नीति आयोग ने फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) पर “सभी के लिए जिम्मेदार AI (Responsible AI for All: RAI)” नामक एक श्वेत-पत्र जारी किया

नीति आयोग ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण श्वेत-पत्र जारी किया है जिसका शीर्षक है "सभी के लिए जिम्मेदार AI (Responsible AI for All: RAI)"। यह श्वेत-पत्र फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) को फर्स्ट यूज केस के रूप में परखता है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में FRT के जिम्मेदारीपूर्ण और सुरक्षित विकास एवं उपयोग के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करना है।

नीति आयोग का उद्देश्य

नीति आयोग का उद्देश्य है कि FRT का उपयोग जिम्मेदारी से हो और यह समाज के सभी वर्गों के लिए सुरक्षित और लाभकारी हो। इसके तहत उन्होंने विभिन्न प्रकार की सिफारिशें दी हैं ताकि इस तकनीक का उपयोग सही दिशा में हो सके।

फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का परिचय

फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रणाली है। यह जटिल एल्गोरिदम का उपयोग करके कुछ छवियों या वीडियो डेटा के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान या सत्यापन करती है।

फेशियल डिटेक्शन

फेशियल डिटेक्शन का उद्देश्य है मानव चेहरे की उपस्थिति का पता लगाना। यह तकनीक एल्गोरिदम का उपयोग करती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जो छवि या वीडियो में चेहरा दिखाई दे रहा है, वह वास्तव में एक मानव चेहरा ही है।

फेशियल एक्सट्रैक्शन

फेशियल एक्सट्रैक्शन तकनीक का उपयोग चेहरे की विशिष्ट विशेषताओं की पहचान करने के लिए किया जाता है। इसमें गणितीय एल्गोरिदम का उपयोग होता है ताकि चेहरे के विभिन्न पहलुओं को पहचान सकें।

फेशियल रिकग्निशन

फेशियल रिकग्निशन में किसी व्यक्ति के चेहरे की विशेषताओं की तुलना मौजूदा डेटाबेस से की जाती है। यह तकनीक स्वचालित रूप से क्रॉस-रेफरेंसिंग (मिलान) करती है और पहचान सुनिश्चित करती है।

फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के उपयोग

सुरक्षा संबंधी उपयोग

FRT का उपयोग सुरक्षा के क्षेत्र में काफी व्यापक है। यह कानून और व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उदाहरण के लिए, निगरानी, गुमशुदा व्यक्तियों की पहचान, भीड़ की निगरानी, सार्वजनिक मानदंडों के उल्लंघन के लिए स्क्रीनिंग आदि।

अन्य क्षेत्र में उपयोग

सेवाओं तक पहुंच में आसानी

फेशियल रिकग्निशन तकनीक का उपयोग हवाई अड्डों पर कॉन्टैक्टलेस ऑनबोर्डिंग जैसी सुविधाओं में भी किया जा सकता है, जैसे कि डिजी यात्रा के माध्यम से।

शैक्षणिक संस्थानों में विशिष्ट आईडी

शैक्षणिक संस्थानों में फेशियल रिकग्निशन का उपयोग विशिष्ट आईडी के रूप में किया जा सकता है जिससे विद्यार्थियों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।

उत्पादों, सेवाओं और सार्वजनिक लाभों तक पहुंच

FRT का उपयोग प्रमाणीकरण के लिए भी किया जा सकता है जिससे लोग आसानी से विभिन्न सेवाओं और सार्वजनिक लाभों तक पहुंच सकते हैं।

फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के साथ जोखिम

डिज़ाइन-आधारित जोखिम

डेटा में पूर्वाग्रह

यदि डेटा में उचित प्रतिनिधित्व नहीं है तो ऑटोमेशन निर्णयों में पूर्वाग्रह हो सकता है। उदाहरण के लिए, चेहरे की पहचान में भेदभाव की संभावना बढ़ सकती है।

जवाबदेही की कमी

इस तकनीक में जवाबदेही की कमी हो सकती है जिससे गलत पहचान या निर्णय की स्थिति में समस्या हो सकती है।

अधिकार-आधारित मुद्दे

निजता का उल्लंघन

FRT में निजता का उल्लंघन हो सकता है यदि व्यक्ति की सहमति के बिना उसका डेटा फीड किया जाए।

डेटा पर नियंत्रण का अभाव

व्यक्तियों का अपने डेटा पर नियंत्रण नहीं होता है जिससे डेटा की सुरक्षा में खतरा हो सकता है।

सुरक्षा और गोपनीयता की चुनौतियाँ

FRT के साथ सुरक्षा और गोपनीयता की कई चुनौतियाँ हैं। इस तकनीक का दुरुपयोग होने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है ताकि डेटा का सही उपयोग हो सके।

वैश्विक परिदृश्य

फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का उपयोग वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है। विभिन्न देशों में इस तकनीक का उपयोग सुरक्षा, चिकित्सा, और सेवाओं में किया जा रहा है। इसके साथ ही, इसकी चुनौतियाँ और जोखिम भी बढ़ रहे हैं।

भारत में फेशियल रिकग्निशन का भविष्य

भारत में FRT का भविष्य उज्ज्वल है। इसके लिए नीति आयोग ने महत्वपूर्ण सिफारिशें दी हैं ताकि इस तकनीक का सही उपयोग हो सके और इससे समाज को लाभ हो।

नीति आयोग की सिफारिशें

नीति आयोग ने कई सिफारिशें दी हैं जैसे कि डेटा की सुरक्षा, निजता की रक्षा, और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उपाय। इसके साथ ही, उन्होंने तकनीकी सुधार और अपडेट की भी सिफारिश की है।

समावेश और विविधता

नीति आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि FRT में समावेश और विविधता होनी चाहिए। सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए ताकि निर्णयों में कोई पूर्वाग्रह न हो।

प्रशासनिक और कानूनी ढाँचा

FRT के सही उपयोग के लिए एक मजबूत प्रशासनिक और कानूनी ढाँचे की आवश्यकता है। इसके लिए नीति आयोग ने विभिन्न सुझाव दिए हैं ताकि यह तकनीक सही दिशा में विकसित हो सके।

तकनीकी सुधार और अपडेट

FRT में समय-समय पर तकनीकी सुधार और अपडेट की आवश्यकता होती है। इसके लिए नीति आयोग ने विभिन्न तकनीकी सुधारों की सिफारिश की है ताकि यह तकनीक और भी प्रभावी हो सके।

नागरिक सहभागिता

FRT के विकास और उपयोग में नागरिकों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि लोग इस तकनीक के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें।

सारांश

नीति आयोग का "सभी के लिए जिम्मेदार AI (Responsible AI for All: RAI)" श्वेत-पत्र भारत में फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के जिम्मेदारीपूर्ण और सुरक्षित उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे इस तकनीक का सही और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित होगा।

FAQs

1. नीति आयोग का उद्देश्य क्या है?

नीति आयोग का उद्देश्य फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का जिम्मेदारीपूर्ण और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करना है।

2. फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी क्या है?

फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी एक AI आधारित प्रणाली है जो छवियों या वीडियो डेटा के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान या सत्यापन करती है।

3. फेशियल डिटेक्शन क्या है?

फेशियल डिटेक्शन का उद्देश्य मानव चेहरे की उपस्थिति का पता लगाना है।

4. फेशियल एक्सट्रैक्शन क्या है?

फेशियल एक्सट्रैक्शन तकनीक चेहरे की विशिष्ट विशेषताओं की पहचान के लिए गणितीय एल्गोरिदम का उपयोग करती है।

5. फेशियल रिकग्निशन में जोखिम क्या हैं?

फेशियल रिकग्निशन में डिज़ाइन-आधारित और अधिकार-आधारित जोखिम होते हैं जैसे डेटा में पूर्वाग्रह, निजता का उल्लंघन, और जवाबदेही की कमी।

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