नीति आयोग की रिपोर्ट: राज्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास की संस्कृति में सुधार

NITI Aayog Report

नीति आयोग ने हाल ही में "राज्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास की संस्कृति में सुधार" नामक एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीय अनुसंधान एवं विकास (R&D) इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना और शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार को प्रोत्साहित करना है। इस लेख में हम इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करेंगे और यह जानेंगे कि यह रिपोर्ट भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

भारत में अनुसंधान एवं विकास (R&D) इकोसिस्टम की स्थिति

2010-11 में भारत का सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) 60,197 करोड़ रुपये था, जो 2020-21 में बढ़कर 1,27,381 करोड़ रुपये हो गया। इस वृद्धि के बावजूद, भारत का अनुसंधान एवं विकास पर जीडीपी का खर्च विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से काफी कम है। 2020-21 के दौरान, अनुसंधान एवं विकास पर सकल व्यय में मुख्य रूप से केंद्र सरकार (43.7%), राज्य सरकारों (6.7%), और उच्चतर शिक्षा संस्थानों (8.8%) का योगदान रहा।

शैक्षणिक संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास का महत्व

शैक्षणिक संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा मिलता है। यह न केवल उद्योग जगत के लिए आवश्यक कौशलों के अनुसार पाठ्यक्रम विकास को प्रोत्साहित करता है, बल्कि सामाजिक चुनौतियों का समाधान भी प्रदान करता है, जैसे कि स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरणीय संधारणीयता आदि।

शैक्षणिक संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास प्रणाली से संबद्ध चुनौतियाँ

भारत ने 2020-21 के दौरान अपने जीडीपी का केवल 0.64% अनुसंधान एवं विकास पर खर्च किया था, जो दक्षिण कोरिया (4.8%) और संयुक्त राज्य अमेरिका (3.5%) जैसे देशों की तुलना में बहुत कम है। इसके अलावा, भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में शोध की अपेक्षा शिक्षण पर अधिक जोर दिया जाता है, जिससे अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देने में कठिनाई होती है। उच्चतर शिक्षा कार्यक्रमों में भी कम छात्र नामांकन लेते हैं; 2021-22 में पीएचडी में केवल 2.12 लाख नामांकन हुए थे।

अनुसंधान एवं विकास की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सिफारिशें

विश्वविद्यालय/संस्थान स्तर पर:

  • अनुसंधान एवं विकास समिति/सेल की स्थापना करनी चाहिए।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से R&D बुनियादी ढांचे में सुधार करना चाहिए।

राज्य स्तर पर:

  • विश्वविद्यालयों को वित्तीय और निर्णय लेने की स्वायत्तता दी जानी चाहिए।
  • अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों को वैश्विक/क्षेत्रीय चुनौतियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।

केंद्र स्तर पर:

  • अनुसंधान एवं विकास पहलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
  • विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में विश्वविद्यालयों/संस्थानों को विशेष दर्जा प्रदान किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

नीति आयोग की यह रिपोर्ट भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस रिपोर्ट में उल्लिखित सिफारिशों को लागू करके, भारत अपने अनुसंधान एवं विकास इकोसिस्टम को सुदृढ़ कर सकता है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकता है।

FAQs

  1. नीति आयोग की रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है?

    • इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास की संस्कृति को बढ़ावा देना और R&D इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना है।
  2. GERD क्या है और इसका महत्व क्या है?

    • GERD (Gross Expenditure on R&D) एक महत्वपूर्ण सूचक है जो किसी देश द्वारा अनुसंधान एवं विकास पर किए गए कुल व्यय को दर्शाता है। यह देश की नवाचार क्षमता और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  3. शैक्षणिक संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास क्यों महत्वपूर्ण है?

    • अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से शैक्षणिक संस्थान रचनात्मकता और नवाचार के केंद्र बनते हैं, जिससे उद्योग जगत के लिए आवश्यक कौशल विकास होता है और सामाजिक चुनौतियों का समाधान मिलता है।
  4. अनुसंधान एवं विकास की संस्कृति में सुधार के लिए क्या सिफारिशें हैं?

    • सिफारिशें विश्वविद्यालय/संस्थान स्तर, राज्य स्तर और केंद्र स्तर पर दी गई हैं, जिनमें R&D समिति की स्थापना, वित्तीय स्वायत्तता, और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पहलें शामिल हैं।
  5. इस रिपोर्ट का दीर्घकालिक प्रभाव क्या हो सकता है?

    • इस रिपोर्ट की सिफारिशों के कार्यान्वयन से भारतीय अनुसंधान एवं विकास इकोसिस्टम सुदृढ़ होगा, जिससे देश की नवाचार क्षमता बढ़ेगी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

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